कोविशील्ड और कोवैक्सिन की कीमत पर SII और भारत बायोटेक से फिर बात करेगी केंद्र सरकार- रिपोर्ट

वैक्सीन खरीद नीति में बदलाव के बाद केंद्र सरकार अब कोविशील्ड और कोवैक्सिन की कीमत के लिए पुनः दोनों कंपनियों से बातचीत करेगी. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक केंद्र सरकार जल्द ही Serum Institute of India और Bharat Biotech से बातचीत करेगी. सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में दोनों वैक्सीन 150 रुपये प्रति डोज के हिसाब से सरकार को मिलती है. इनमें टैक्स शामिल नहीं है लेकिन अब नई नीति के अनुसार दोनों वैक्सीन की संसोधित कीमत तय की जाएगी. इसके लिए बातचीत की प्रक्रिया चल रही है. 

15000 करोड़ का अतिरिक्त बजट आवंटन
हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है. वित्त मंत्रालय, स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण, नीति आयोग के सदस्य डॉ वी के पॉल, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. हाल ही में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि केंद्र सरकार वैक्सीन की 75 प्रतिशत डोज वैक्सीन निर्माता कंपनियों से खरीदेगी और राज्य सरकार को मुफ्त में देगी. इससे पहले राज्य सरकार का 25 प्रतिशत कोटा था जो उसे खरीदना होता था लेकिन अब उन्हें केंद्र सरकार मुफ्त में वैक्सीन देगी. केंद्र सरकार का मकसद 21 जून से 18 साल से ऊपर के सभी नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराना है. इससे 35000 करोड़ रुपये के बजट आवंटन की तुलना में 15000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होने की संभावना है. 

150 रुपये प्रति डोज केंद्र सरकार को मिलती है वैक्सीन 
जनवरी में जब आम लोगों के लिए वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत हुई थी, तब केंद्र सरकार ने कोविशील्ड की 1.1 खुराक 200 रुपये की दर पर जबकि कोवैक्सिन की 55 लाख खुराक 206 रुपये की दर पर खरीदी थी. इनमें टैक्स शामिल नहीं था. बाद में दोनों वैक्सीन सरकार को 150 रुपये में मिलने लगी. अप्रैल तक निजी अस्पताल भी सरकार से ही वैक्सीन खरीदते थे. तब तक सरकार ने अस्पताल को अधिकतम 250 रुपये वसूलने की मंजूरी दी थी. जब 18 से 44 साल वालों के लिए वैक्सीनेशन शुरू हुआ था, तब भी केंद्र सरकार इसी कीमत पर दोनों वैक्सीन को खरीदती थी. इसके बाद वैक्सीन निर्माताओं को निजी अस्पतालों और राज्य सरकारों के लिए नई दर पर वैक्सीन देने की मंजूरी मिल गई. इसके बाद कोविशील्ड की कीमत राज्य सरकारों के लिए 400 रुपये और निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपये हुई. बाद में इसे राज्य सरकार के लिए 600 और अस्पतालों के लिए 1200 रुपये तक कर दी गई. 

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