Explained: शराब के मामले में देश में एक राष्ट्र-एक नीति नहीं! कर्नाटक-महाराष्ट्र सहित इन 7 राज्यों में होती है होम डिलीवरी

नई दिल्ली: देश में जानलेवा कोरोना वायरस के दौरान पिछले साल लगाए गए लॉकडाउन से शराब कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ा. कई राज्यों ने कुछ दिन बाद शराब की दुकानें यह कहकर खोल दीं कि इससे उनके राजस्व पर असर पड़ रहा है. यहां तक की राजधानी दिल्ली में तो लॉकडाउन के दौरन शराब पर वैट भी बढ़ा दिया गया. देश के हर राज्य में शराब को लेकर अलग कायदे कानून हैं. सरकार देश में एक राष्ट्र एक नीति की बात करती है, लेकिन शराब के मामले में ऐसा नहीं है.

इन 4 राज्यों में बैन है शराब

  • बिहार
  • गुजरात
  • नगालैंड
  • मिजोरम

ये सात राज्य करते हैं होम डिलीवरी 

  • छत्तीसगढ़
  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक
  • पंजाब
  • झारखंड
  • ओडिशा
  • और अब दिल्ली

इन राज्यों ने लगाया बैन, लेकिन खाली हो गया खजाना

हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, लक्षद्वीप, कर्नाटक जैसे राज्यों ने भी शराब पर बैन लगाया था, लेकिन राजस्व कम होने की बात कहकर उन्होंने शराब से फिर बैन हटा लिया.  

  • हरियाणा ने साल 1996 में शराबबंदी की, लेकिन 1998 में प्रतिबंध हटा लिया.
  • आंध्र प्रदेश ने साल 1994 में शराबबंदी की, लेकिन 1997 में प्रतिबंध हटा लिया.
  • केरल ने साल 2014 में शराबबंदी की, लेकिन 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पलट दिया.

यानि साफ है कि देश में शराब को लेकर एक राष्ट्र एक नीति नहीं अपनाई जा रही. कहीं शराब बैन है तो कहीं घर घर तक पहुंचाई जा रही है. जानकार बताते हैं कि देश में जीएसटी लागू होने के बाद से शराब से होने वाला राजस्व राज्य सरकारों के लिए और जरूरी हो गया.

शराब को लेकर संविधान में क्या प्रावधान हैं?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 में स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले मादक पेय यानि ड्रिंक्स (जैसे शराब, बीयर) पर प्रतिबंध लगाने का जिक्र किया गया है. हालांकि ये अनुच्छेद सीधे तौर पर शराब बैन करने को नहीं कहता है, लेकिन यह जरूर कहता है कि सरकार इसपर बैन लगाने की कोशिश कर सकती है. इतना ही नहीं इसे लागू करने के लिए सरकार को बाध्य भी नहीं किया जा सकता.

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