Shani Puja Upay: शनि प्रकोप से लेनी है मुक्ति तो शनिवार के दिन शनि पूजा में न करें काम

Shani Puja Upay 2021: शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है क्यों कि ये लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं. इस लिए सभी लोग इन्हें हर वक्त प्रसन्न करने की कोशिश करते रहते हैं. इन्हें प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन इनकी पूजा करना उत्तम माना जाता है. परंतु लोगों को यह ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि इनकी पूजा में ये गलतियां उनसे भूलकर भी न हों. नहीं तो आप अनेकों समस्याओं से घिर जायेंगे और जीवन नर्क जैसा बन जाएगा. हर कार्यों में असफलता ही मिलेगी.

इस विधि से करें शनिदेव की पूजा : शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके साफ़ सुथरा कपड़ा धारण करें. उसके बाद घर के मंदिर में या पास के मंदिर में शनिदेव की प्रतिमा या मूर्ति के सामने सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें. इसके बाद शनिदेव को सरसों का तेल भी अर्पित करें. अब शनि देव को पुष्प, अक्षत धूप, दीप, और प्रसाद के लिए मिठाई अर्पित करें तथा भोग लगाएं. अब शनि देव के मन्त्रों का जाप करें. इसके बाद आरती और शनि चालीसा का पाठ करें. शनिवार के दिन दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है.

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शनिदेव की पूजा में करें ये भूल

भक्त को कभी भी शनि देव से आंख मिलाकर उनकी पूजा नहीं करनी चाहिए. उपासक को चाहिए कि वे शनिदेव का सारा पूजन कार्य सिर को नीचे झुकाकर ही करें. ऐसी मान्यता है कि शनिदेव को उनकी पत्नी से श्राप मिलने से उनकी दृष्टि वक्र हो गई है. ऐसे में आंख मिलाकर उनकी पूजा करने से उपासक के जीवन में अनिष्ट हो सकता है.

शनि देव की पूजा  के समय उपासक को अपना मुंह पूर्व की ओर और शनिदेव की प्रतिमा का मुंह पश्चिम दिशा की ओर करके करना चाहिए. अन्य दिशाओं में रखकर पूजा करना अशुभ होता है.

शनि गायत्री मंत्र: ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।

शनि बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।

शनि स्तोत्र: ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।  छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।

 

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